तमिलनाडु एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रश्न का सामना कर रहा है जो संसद में उसकी आवाज़ को नया आकार दे सकता है और पूरे दक्षिण भारत को प्रभावित कर सकता है। परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन पर केंद्र के दबाव ने राज्य में गहरी चिंताएं बढ़ा दी हैं। बहस के केंद्र में – क्या तमिलनाडु संसद में अपना हिस्सा खो देगा?
