जैविक हथियारों की चुनौती से निपटने के लिए ढांचे की जरूरत: जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में 'जैविक हथियारों के 50 वर्ष' विषय पर सम्मेलन में भाग लिया। फोटो: X/@DrSजयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में ‘जैविक हथियारों के 50 वर्ष’ विषय पर सम्मेलन में भाग लिया। फोटो: X/@DrSजयशंकर

भारत ने सोमवार (1 दिसंबर, 2025) को अनिश्चित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा माहौल के मद्देनजर जैविक हथियारों के किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए एक वैश्विक तंत्र की वकालत की।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि गैर-राज्य तत्वों द्वारा जैविक हथियारों का “दुरुपयोग” अब दूर की संभावना नहीं है और ऐसी चुनौती से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।

श्री जयशंकर जैविक हथियार सम्मेलन (बीडब्ल्यूसी) के 50 वर्ष पूरे होने पर एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, “जैव आतंकवाद एक गंभीर चिंता है जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पर्याप्त रूप से तैयार रहना होगा। फिर भी बीडब्ल्यूसी के पास अभी भी बुनियादी संस्थागत संरचनाओं का अभाव है।” श्री जयशंकर ने कहा, “इसमें कोई अनुपालन प्रणाली नहीं है, इसके पास कोई स्थायी तकनीकी निकाय नहीं है और नए वैज्ञानिक विकास को ट्रैक करने के लिए कोई तंत्र नहीं है। आत्मविश्वास को मजबूत करने के लिए इन अंतरालों को पाटना होगा।”

श्री जयशंकर ने कहा, भारत ने लगातार बीडब्ल्यूसी के भीतर मजबूत अनुपालन उपायों का आह्वान किया है, जिसमें आज की दुनिया के लिए डिज़ाइन किया गया सत्यापन भी शामिल है। श्री जयशंकर ने कहा, “भारत शांतिपूर्ण उपयोग के लिए सामग्रियों और उपकरणों के आदान-प्रदान को सक्षम करने वाले अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और सहायता का समर्थन करता है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने वैज्ञानिक और तकनीकी विकास की व्यवस्थित समीक्षा का भी आह्वान किया है ताकि शासन वास्तव में नवाचार के साथ तालमेल बनाए रख सके।”

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