लालबागचा राजा 2025 अंबानी परिवार ने चढ़ाया 20 किलो सोना और ₹15 करोड़ नकद, भव्य पहले लुक ने जीता दिल

लालबागचा राजा का पहला लुक – श्रद्धा और भव्यता का संगम

मुंबई का सबसे चर्चित और लोकप्रिय गणेशोत्सव तब शुरू होता है जब लालबागचा राजा का पहला दर्शन होता है। इस बार यानी 2025 में भी यह पल बेहद खास रहा। 24 अगस्त को मंडल ने लालबागचा राजा का पहला लुक मीडिया और भक्तों के सामने पेश किया।

इस बार बप्पा को गोल्डन सिंहासन पर बैठाया गया है। उनका बैंगनी धोती लुक, सोने की चमकती सजावट और महल जैसी विशाल सजावट ने हर किसी का दिल जीत लिया। पहली झलक देखने के बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियोज़ वायरल हो गए।

लालबागचा राजा की ऊँचाई करीब 50 फीट रखी गई है। मंडप को भी इस साल खास तौर पर थीम आधारित बनाया गया है, जिसमें रोशनी और कलाकारी का अनोखा संगम देखने को मिला।

अंबानी परिवार का भारी दान – सोना और नकद

हर साल की तरह इस बार भी मुकेश अंबानी और उनका परिवार बप्पा के दरबार में पहुँचा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में अंबानी परिवार ने:

  • ₹15 करोड़ नकद दान किया

  • 20 किलो सोना का मुकुट और आभूषण अर्पित किए

यह भव्य दान भक्तों और सोशल मीडिया पर चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। अंबानी परिवार का यह योगदान सिर्फ आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि समाज के लिए बड़ा संदेश भी है।

अंबानी परिवार और लालबागचा राजा – आस्था का रिश्ता

लालबागचा राजा सिर्फ आम भक्तों की आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि बड़े उद्योगपति और सेलिब्रिटीज़ भी यहां बप्पा के दर्शन के लिए आते हैं।

पिछले साल यानी 2024 में अनंत अंबानी ने बप्पा को 20 किलो सोने का मुकुट भेंट किया था। इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपये बताई गई थी। यह मुकुट इस साल भी बप्पा के शृंगार का हिस्सा बना हुआ है।

इसके अलावा अंबानी परिवार लंबे समय से इस मंडल का सहयोग करता आ रहा है। कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने मंडल को 24 डायलिसिस मशीनें दान की थीं, जिससे गरीब मरीजों की मदद हो सके। यही कारण है कि अनंत अंबानी को मंडल का मानद सदस्य और सलाहकार भी बनाया गया है।

2025 में अंबानी परिवार का कोई नया दान सामने नहीं आया है, लेकिन उनका पहले का योगदान आज भी मंडल और भक्तों की आस्था का बड़ा हिस्सा है।

अंबानी परिवार का नकद दान

इस बार की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अंबानी परिवार ने लालबागचा राजा को लगभग ₹15 करोड़ का नकद दान किया है। दान पेटी में अंबानी परिवार के नाम से भारी रकम जमा हुई है, जिसे ट्रस्ट की ओर से आने वाले समय में सामाजिक कार्यों और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

आस्था और परंपरा का प्रतीक

अंबानी परिवार हर साल लालबागचा राजा में दर्शन के लिए पहुँचता है और भव्य दान करता है। यह सिर्फ उनकी आस्था का नहीं बल्कि समाज को लौटाने का भी प्रतीक माना जाता है। अंबानी परिवार के दान से ट्रस्ट को बड़े स्तर पर सामाजिक कार्य करने में मदद मिलती है – जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और गरीबों की सहायता।

लालबागचा राजा का पहला लुक कहां देखें?

कई लोग यह सवाल पूछते हैं कि लालबागचा राजा का पहला लुक OTT प्लेटफॉर्म्स पर देखने को मिलेगा या नहीं। तो यहां साफ कर दें – लालबागचा राजा का पहला लुक Netflix, Amazon Prime या JioCinema पर उपलब्ध नहीं होता।

मंडल हर साल इसका प्रसारण अपनी ऑफिशियल वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर करता है।

  • YouTube (Lalbaugcharaja Official Channel)

  • Facebook

  • Instagram

  • X (Twitter)

  • और लालबागचा राजा का ऑफिशियल मोबाइल ऐप

यानी हर कोई अपने घर बैठे मुफ्त में बप्पा का पहला लुक और लाइव दर्शन कर सकता है।

गणेश चतुर्थी 2025 – तारीख और आयोजन

इस साल गणेश चतुर्थी का त्योहार बुधवार, 27 अगस्त 2025 से शुरू होकर शनिवार, 6 सितंबर 2025 (अनंत चतुर्दशी) तक चलेगा। इन 11 दिनों तक मुंबई समेत पूरे देश में गणपति बप्पा की धूम देखने को मिलेगी।

लालबागचा राजा मंडल हर साल लाखों भक्तों की मेज़बानी करता है। 2025 में भी भक्तों का सैलाब उमड़ने की संभावना है।

लालबागचा राजा दर्शन – टिकट, लाइन और समय

समय

  • रोज़ाना सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक दर्शन का समय रहेगा।

टिकट

  • जनरल दर्शन – ₹50

  • वीआईपी दर्शन – ₹200

  • स्पेशल दर्शन – ₹500

टिकट ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से लिए जा सकते हैं।

लाइन

  • नवसाची लाइन – इसमें भक्त बप्पा के चरणों को छूकर आशीर्वाद ले सकते हैं। लेकिन इसमें 20 से 25 घंटे तक लंबा इंतज़ार करना पड़ता है।

  • मुखदर्शन लाइन – इसमें भक्त थोड़ी दूरी से दर्शन कर सकते हैं। यहाँ प्रतीक्षा समय 1 से 10 घंटे तक हो सकता है।

कैसे पहुंचे लालबागचा राजा?

लालबागचा राजा का मंडप मुंबई के परैल इलाके में स्थित है।

  • रेलवे स्टेशन – करी रोड, चिचपोकली और लोअर परैल सबसे नज़दीकी स्टेशन हैं।

  • बस रूट्स – 124, 134, 66, 132 और 172 नंबर की बसें सीधा मंडल तक पहुंचाती हैं।

  • मेट्रो – मुंबई मेट्रो के कई स्टेशनों से मंडल तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

90 साल पुरानी परंपरा – लालबागचा राजा का इतिहास

लालबागचा राजा मंडल की स्थापना 1934 में हुई थी। उस समय स्थानीय मछुआरे और मज़दूरों ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए गणपति बप्पा से मन्नत मांगी थी। उनकी मन्नत पूरी हुई और तब से लालबागचा राजा को “मनोकामना पूरी करने वाले गणपति” कहा जाने लगा।

पिछले 90 सालों से बप्पा की मूर्ति बनाने का जिम्मा कांबली परिवार निभा रहा है। हर साल मूर्ति का डिज़ाइन थोड़ा-थोड़ा बदलता है, लेकिन बप्पा का रौबिला और दिव्य चेहरा हमेशा वही रहता है।

भीड़ और भक्तों की भावनाएँ

लालबागचा राजा के दर्शन के लिए हर दिन लाखों लोग आते हैं। मुंबई ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी भक्त यहां पहुंचते हैं।

कुछ लोग सोशल मीडिया पर लिखते हैं –

“पहली झलक देखने के बाद मन में असीम शांति मिलती है। यह पल शब्दों से परे है।”

वहीं कुछ लोग भीड़ और इंतज़ार से परेशान होकर कहते हैं –

“3-4 घंटे की लाइन में खड़े रहने के बाद भी बस कुछ सेकंड का दर्शन होता है।”

फिर भी, यह भीड़ और यह इंतज़ार हर भक्त को बप्पा के दर्शन के बाद भुला देता है।

गणेश चतुर्थी 2025 – मुंबई की रौनक

इस बार मुंबई में गणेश चतुर्थी और भी खास होने वाली है। लालबागचा राजा का पहला लुक सोशल मीडिया पर छा चुका है। मंडप की सजावट, सुरक्षा इंतज़ाम और भक्तों की आस्था – सब मिलकर इसे एक अद्भुत अनुभव बनाते हैं।

लालबागचा राजा न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह मुंबई की संस्कृति, लोगों की एकजुटता और आस्था का प्रतीक है।

निष्कर्ष

  • पहला लुक – 24 अगस्त 2025 को पेश हुआ, जिसमें बप्पा गोल्डन सिंहासन पर विराजमान हैं।

  • अंबानी का योगदान – 20 किलो सोने का मुकुट (15 करोड़ रुपये) और कोरोना काल में डायलिसिस मशीनें।

  • OTT पर दर्शन – Netflix या Prime पर नहीं, बल्कि Mandal की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर।

  • दर्शन – 27 अगस्त से 6 सितंबर तक, टिकट ₹50 से ₹500 तक।

  • इतिहास – 90 साल पुराना मंडल, कांबली परिवार की मूर्ति कला।

लालबागचा राजा हर साल की तरह इस बार भी भक्तों की आस्था का केंद्र बने हुए हैं। जब भीड़, लंबी लाइनें और इंतज़ार थकाते हैं, तब बप्पा के दर्शन से मिलने वाली शांति और खुशी सब भुला देती है।

इस बार के गणेशोत्सव में अंबानी परिवार का यह योगदान चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। भक्तों का कहना है कि बप्पा के दरबार में चाहे कोई छोटा हो या बड़ा, सब समान हैं, लेकिन जब बड़े उद्योगपति भी इतनी श्रद्धा से दान करते हैं तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है।

गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया!

Leave a Comment