लगातार बारिश से हिमाचल में हाहाकार
हिमाचल प्रदेश 2025 की बरसात ने लोगों के बीच डर और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे राज्य को थर्रा कर रख दिया है। पहाड़ी ढलानों से लगातार मलबा गिर रहा है, नदियाँ उफान पर हैं और जगह-जगह सड़कों का संपर्क टूट गया है।
मौसम विभाग के मुताबिक, इस साल अब तक औसत से 30% ज्यादा बारिश हुई है। इसका सीधा असर सड़कों, पुलों, घरों और फसलों पर पड़ा है।
किन जिलों में सबसे ज़्यादा नुकसान
हिमाचल का मध्य और ऊपरी हिस्सा सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है।
-
शिमला: कई जगह मकान ध्वस्त हुए और सड़कें टूटकर वाहनों के साथ बह गईं।
-
कुल्लू-मनाली: पर्यटन के लिए मशहूर ये इलाका पूरी तरह से बारिश की मार झेल रहा है। कई होटल और गेस्ट हाउस डैमेज हो गए हैं।
-
मंडी: राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-21) पर कई जगहों पर लैंडस्लाइड से ट्रैफ़िक पूरी तरह ठप है।
-
चंबा और किन्नौर: यहाँ पहाड़ों से गिरे मलबे ने गांवों का संपर्क तोड़ दिया है।
इन जगहों पर स्थानीय लोग खाने-पीने की चीज़ों और दवाइयों की कमी झेल रहे हैं।
जान-माल का नुकसान
सरकारी रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 150 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है जबकि सैकड़ों लोग घायल हैं। हजारों मकान और दुकानें या तो आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं या पूरी तरह ध्वस्त। किसानों की फसलें भी पानी में बह गईं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है। सेब की बागवानी, जो हिमाचल की रीढ़ कही जाती है, बुरी तरह प्रभावित हुई है।
सड़कें और पुल ध्वस्त
बारिश और भूस्खलन ने राज्य की लगभग 700 से अधिक सड़कों को नुकसान पहुँचाया है। 20 से ज़्यादा पुल बह गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई जगहों पर सेना और एनडीआरएफ की मदद से वैकल्पिक रास्ते बनाए जा रहे हैं, ताकि राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँच सके।
पर्यटन पर असर
पर्यटन पर आधारित हिमाचल की अर्थव्यवस्था इस तबाही से हिल गई है। पर्यटक स्थलों पर फंसे लोगों को एयरलिफ्ट करना पड़ा। होटल इंडस्ट्री और टैक्सी ऑपरेटरों को भारी नुकसान हुआ है। कई देशों से आए सैकड़ों पर्यटक अपने-अपने दूतावासों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
सरकार और प्रशासन की कार्रवाई
राज्य सरकार ने हालात को देखते हुए तुरंत आपात बैठक बुलाई और राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के आदेश दिए।
-
एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 40 से अधिक टीमें राज्य में तैनात की गई हैं।
-
हेलिकॉप्टरों से राहत सामग्री भेजी जा रही है और फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है।
-
सरकार ने ₹500 करोड़ का विशेष राहत पैकेज जारी किया है।
-
प्रभावित परिवारों को तात्कालिक मदद के तौर पर ₹10,000 से ₹50,000 तक की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
पीएम और सीएम का बयान
प्रधानमंत्री ने हिमाचल के हालात पर चिंता जताई और केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। वहीं, मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि राज्य को दोबारा खड़ा करने में समय लगेगा, लेकिन सरकार हर नागरिक के साथ खड़ी है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक और भारी बारिश की चेतावनी दी है। ऐसे में प्रशासन और सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। नदी-नालों के पास जाने से बचें और पहाड़ी रास्तों पर यात्रा बिल्कुल न करें।
खासतौर पर पर्यटकों और स्थानीय निवासियों से कहा गया है कि वे इस समय कहीं घूमने न जाएँ। यह समय सावधानी और सुरक्षा बरतने का है, न कि पर्यटन करने का।
प्राकृतिक आपदा से सीख
हर साल भारी बारिश से हिमाचल को भारी नुकसान झेलना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित निर्माण, पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई और ग्लोबल वार्मिंग के कारण ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ और बढ़ रही हैं। सरकार के साथ-साथ लोगों को भी पर्यावरण संतुलन की जिम्मेदारी समझनी होगी।
सोशल मीडिया पर अपील
बारिश और तबाही की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं। कई सामाजिक संगठन और एनजीओ राहत सामग्री भेज रहे हैं। स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए हैं। युवाओं की टीमें गांव-गांव जाकर भोजन और दवाइयाँ बाँट रही हैं।
भविष्य की चुनौतियाँ
विशेषज्ञों का मानना है कि यह तबाही जलवायु परिवर्तन और अंधाधुंध निर्माण का नतीजा है। अगर समय रहते पर्यावरण और पहाड़ी इलाकों की नाज़ुकता को ध्यान में नहीं रखा गया, तो आने वाले सालों में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। सरकार अब दीर्घकालिक प्लान पर भी विचार कर रही है, जिसमें नदी किनारे निर्माण पर रोक, जंगलों की सुरक्षा और वैकल्पिक सड़क नेटवर्क विकसित करने जैसे कदम शामिल होंगे।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश 2025 की यह बरसात एक बार फिर से यह याद दिलाती है कि प्रकृति के सामने इंसान कितना छोटा है। सरकार राहत और बचाव कार्यों में जुटी है, लेकिन जब तक हर व्यक्ति सतर्क नहीं होगा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नहीं बनेगा, तब तक ऐसी तबाहियाँ दोहराई जाती रहेंगी। इस समय सबसे ज़रूरी है कि लोग सुरक्षित रहें, सरकार की गाइडलाइंस का पालन करें और अनावश्यक रूप से यात्रा या पर्यटन से बचें।
