अमृतसर, एसजीपीसी ने मंगलवार को कहा कि वह श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 328 पवित्र ‘सरूपों’ के मामले में न तो पुलिस के साथ सहयोग करेगी और न ही कोई रिकॉर्ड साझा करेगी।

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने एसजीपीसी सचिव प्रताप सिंह के नेतृत्व में यहां हुई अधिकारियों की बैठक के बाद अपना रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ श्री अकाल तख्त साहिब की जांच रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई पहले ही की जा चुकी है, जिनके आदेश सिख संस्था के लिए अंतिम हैं।
सिंह ने कहा कि तीन कर्मचारी कंवलजीत सिंह, बाज सिंह और दलबीर सिंह कथित तौर पर व्यक्तिगत लाभ के लिए पवित्र ‘सरूपों’ से संबंधित चढ़ावे का दुरुपयोग करने और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ करने में सीधे तौर पर शामिल पाए गए। उन्होंने कहा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारियों को भी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि एसजीपीसी के नियमों के अनुसार, जब भक्त या गुरुद्वारा समितियां ‘सरूप’ मांगती हैं, तो सचिव स्तर पर सत्यापन के बाद मंजूरी दी जाती है। चढ़ावा जमा किया जाता है, रसीदें जारी की जाती हैं और आधिकारिक रिकॉर्ड में प्रविष्टियाँ की जाती हैं। संबंधित कर्मचारी कथित तौर पर इस निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने में विफल रहे।
सिंह ने कहा कि एसजीपीसी सिख गुरुद्वारा अधिनियम के तहत कार्य करती है और प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारियां परिभाषित हैं, और कोई भी लापरवाही सेवा नियमों के अनुसार विभागीय कार्रवाई को आमंत्रित करती है।
एसजीपीसी अधिकारियों ने पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा दिए गए बयानों को भी खारिज कर दिया, उन्हें “निराधार” बताया और उनका उद्देश्य सिख संस्था को बदनाम करना था।
सिंह ने कहा कि एसजीपीसी पूरे सिख समुदाय की है और इसके खिलाफ झूठा प्रचार इसकी गरिमा को नुकसान पहुंचाता है।
उन्होंने इन दावों को भी खारिज कर दिया कि एसजीपीसी अध्यक्ष ‘सरूपों’ से संबंधित कोई निजी डायरी रखते हैं, उन्होंने ऐसे दावों को “भ्रामक” बताया।
उन्होंने कहा कि ‘सरूप’ पूरी तरह से स्थापित नियमों के अनुसार जारी किए जाते हैं और सभी रिकॉर्ड विभागीय बहीखातों में रखे जाते हैं, जिसमें चढ़ावे के लिए रसीदें जारी की जाती हैं।
पूर्व प्रकाशन विभाग प्रभारियों और संयुक्त सचिवों ने भी कहा कि पवित्र ‘सरूप’ जारी करने के लिए डायरी या पर्चियों की कोई व्यवस्था नहीं है।
एसजीपीसी ने पंजाब सरकार से संस्था को निशाना बनाने से परहेज करने की अपील की और दोहराया कि श्री अकाल तख्त साहिब के निर्देशों के अनुसार, वह इस मामले में सरकार या पुलिस को सहयोग नहीं दे सकती है।
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