
विदेश मंत्री एस. जयशंकर 20 दिसंबर, 2025 को पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हैं। फोटो: X/@DrSजयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार (20 दिसंबर, 2025) को कहा कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आया है और शक्ति और प्रभाव के कई केंद्र उभरे हैं।
श्री जयशंकर ने पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “कोई भी देश, चाहे कितना भी शक्तिशाली हो, सभी मुद्दों पर अपनी इच्छा नहीं थोप सकता।”
उन्होंने कहा, “सिर्फ इतना ही नहीं, अब इसका मतलब यह भी है कि दुनिया में देशों के बीच स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा है और यह अपना संतुलन खुद बनाती है।” उन्होंने कहा, ”शक्ति और प्रभाव के कई केंद्र उभरे हैं।”
उन्होंने कहा, “शक्ति के विचार में व्यापार, ऊर्जा, सेना, संसाधनों, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा की कई परिभाषाएँ हैं। यह इसे एक विशेष रूप से जटिल घटना बनाता है।”
श्री जयशंकर ने कहा, “यह पहचानना भी आवश्यक है कि वैश्विक शक्तियां अब सार्वभौमिक होने में सक्षम नहीं हैं।”
मंत्री ने कहा, वैश्वीकरण ने हमारे सोचने और काम करने के तरीके को मौलिक रूप से बदल दिया है।
श्री जयशंकर ने कहा, “अगर हमारी जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल बनाए रखना है तो उसे पर्याप्त और समसामयिक विनिर्माण विकसित करना चाहिए।”
प्रकाशित – 20 दिसंबर, 2025 01:05 अपराह्न IST
