केरल उच्च न्यायालय ने केयू वीसी द्वारा पूर्व रजिस्ट्रार को जारी ज्ञापन पर रोक लगा दी

केरल उच्च न्यायालय ने उन आरोपों के ज्ञापन पर रोक लगा दी है जो केरल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति मोहनन कुन्नूमल ने अपने पूर्व रजिस्ट्रार केएस अनिलकुमार को जारी किया था।

मेमो को चुनौती देने वाली श्री अनिलकुमार की याचिका के बाद न्यायमूर्ति पीवी कुन्हिकृष्णन की पीठ ने मेमो पर रोक लगा दी। यह कहते हुए कि आरोपों का मेमो बिना किसी अधिकार के जारी किया गया था, अदालत ने अगले आदेश तक मेमो के आधार पर आगे की सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी। इसमें कहा गया है कि अगर कोई तात्कालिकता हो तो वीसी जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं और मामले को उठा सकते हैं।

वीसी ने श्री अनिलकुमार को मेमो जारी कर आरोप लगाया था कि उन्होंने निलंबन अवधि के दौरान फाइलों को संभाला। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या वीसी के पास मेमो जारी करने का अधिकार है।

माना जाता है कि विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार का नियुक्ति प्राधिकारी है। यहां, कुलपति ने केरल विश्वविद्यालय अधिनियम, 1974 की धारा 10(13) लागू की और आरोपों का ज्ञापन जारी किया। अदालत ने कहा कि ऐसी कौन सी आपातकालीन स्थिति थी जिसके कारण मेमो जारी करना पड़ा, यह स्पष्ट नहीं है।

श्री अनिलकुमार ने अपनी याचिका में कहा था कि धारा लागू करके मेमो जारी करने के बाद, इसे 24 दिसंबर, 2025 को आयोजित सिंडिकेट बैठक में नहीं रखा गया था। इससे पता चलता है कि मेमो के पीछे कुछ है।

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